Thursday, March 20, 2008

हूँ ज् परमात्मा छू एम् नक्की कर

आत्मा छु परमात्मा छु - परमात्मा छु
शुद्ध छु ने पूर्ण छु
ग्नान - आनंद छु।

देह मरे छे - हूँ नथी मरतो
अजरअमर हूँ आत्मा छु।

हे जीव तू प्रभु छो के पामर ?
तू परमात्मा छो एम् नक्की कर ! तू परमात्मा छो एम् नक्की कर !!
पण प्रभु ! पहेला एम् तो नक्की करवा दो के तमे परमात्मा छो अने तमे महान छो !
ऐ अमे परमात्मा छिए ऐ क्यारे नक्की क्यारे थासे ? के ज्यारे तू अनुभव कर, के आ हूँ परमात्मा केवो छु!!
निश्चय नक्की थया वगर व्यव्हार नक्की नही थाय !

"पूर्णता ने लक्षे शरुआत एज

वास्तविक शरुआत छे"
(पूर्णता के लक्ष की शुरुआत ही वास्तविक शुरुआत हैं )

वचनामृत - अमूल्य शब्द

हे जीव ! जीवनमा कोई वार पहाड़ जेवी प्रतिकुलताओ आवे तो पण आत्मश्रधा गुमाविश नही, मन ने समतोल राखजे। कोइपण दुःख नो उकेल अने अंत होय छे।
तारे बिजा कोई सहारानी जरुर नथी। तारो ग्नायक आत्मा तारी पासे ज छे

- पूज्य बहेनश्री भगवती चम्पामाता