Saturday, January 03, 2009

सहजत्मा स्वरुप सर्वग्न देव परम गुरु परम गुरु

सहजात्म स्वरुप सर्वग्न देव परम गुरु परम गुरु।
शिव रमणी रमणी रमणार तू तुही देव नो देव, ॐ गुरु ॐ गुरु ॐ गुरुदेव, जय गुरु जय गुरु जय गुरुदेव।
-पूज्य श्री श्रीमद राज चंद्रजी के बोल पूज्य गुरुदेवश्री को अत्यंत ह्रदय प्रिय थे

सुखधाम अनंत सु संत चही, दिन रात्र रहे तद ध्यान महि
प्रशांति अनंत सुधामय जे, प्रनमु पद ते वरते जय ते
-प्रषम मूर्ति भगवती माताजी का मुमुक्षुओ को अंतिम संदेश