आत्मा ग्नानम स्वयं ग्नानम ग्नानातदन्यत् करोतिकिम
परमावस्य कर्तात्मा मोहोयम व्यव्हारिणाम
-श्रीमद् अमृतचंद्रजी आचार्यदेवजी
Jainism
आत्मा ग्नानम स्वयं ग्नानम ग्नानातदन्यत् करोतिकिम
परमावस्य कर्तात्मा मोहोयम व्यव्हारिणाम
-श्रीमद् अमृतचंद्रजी आचार्यदेवजी