Monday, September 21, 2009

चिंतन कणिका

आत्मा ग्नानम स्वयं ग्नानम ग्नानातदन्यत् करोतिकिम
परमावस्य कर्तात्मा मोहोयम व्यव्हारिणाम

-श्रीमद् अमृतचंद्रजी आचार्यदेवजी