जो तने धर्मं नु अस्तित्व अनुकूळ न आवतु होय तो निचे कहू छू ते विचारी जजे
१ तू जे स्थिति भोगवे छे ते शा प्रमाण थी छे ?
२ आवति कालनी वात शा माटे जानी शकतो नथी ?
३ तू जे इच्छे छे ते शा माटे मलतू नथी ?
४ चित्र विचित्रता नु प्रयोजन शु छे ?
-----
पग मुकता पाप छे, जोता ज़ेर छे अने माथे मरण रह्यु छे, ऐ विचारे आजना दिवसमाँ प्रवेश कर ।
----
जिंदगी टुकी छे अने जंजाळ लम्बी छे माटे जंजाळ टुकी कर तो सुख रुपे ज़िन्दगी लागसे।
----
जो तू स्त्री होय तो तारा पति प्रत्येनी धर्म करणीने सम्भाळ, दोष थयो होय तो तेनी क्षमा याच अने कुटुंब भणि द्रष्टि कर ।
- पूज्य श्रीमद् राजचंद्रजी कृपाळुदेव
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment